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Tuesday, 10 December 2019

यकृत रोग क्या होता है ?


क्या आप जानते हो कि शरीर में यकृत कहा होता है ,शरीर  के दाए  भाग की स्थित पसलियों के नीचे यकृत होता है। यकृत रोग शुरू होते ही सर्दी के साथ ज्वर (बुखार ) आ जाता है। बाद में ज्वर (बुखार ) धीरे धीरे काम पड़ने लगता है , लेकिन यकृत की बीमारी बानी रहती है।  और जब यकृत रोग पुराना होता जाता है तो यकृत कठोर अवं पहले से बड़ा होता जाता है। और यकृत वाली जगह से हाथ से दबाने पर उस जगह पर दर्द करता है। और ज्यादा मेहनत करने से भी यकृत में दर्द होता है।  और बहुत बार ऐसे भी बिना किसी कारण के भी दर्द होता है।
यकृत के प्रमुख लक्षण निम्न है, जैसे जीभ  सफ़ेद ,सिर  दर्द ,व शरीर में कमजोरी ,रक्ताल्पता ,अपच ,दाहिने कंधे के पीछे दर्द ,और मुँह का बेस्वाद लक्षण होते है। यकृत रोग जब बढ़ता है तो यह घातक रूप ले लेता है और अंत में यकृत का संकोचन होकर रोगी की मृत्यु हो जाती है।
यकृत रोग पैदा होने के प्रमुख कारण-अमेबिक पेचिश पुरानी होने पर अमेबा रोगाणु  यकृत में जाने से पुराना मलेरिया ज्वर (बुखार ), कुनैन या पारे का दुर्व्यवहार ,अधिक शराब का सेवन करना ,और अत्यधिक मीठा खाना आदि रोगो से यकृत रोगो की उत्पत्ति होती है। अधिकतर यह रोग आठ साल तक के बच्चो के यह रोग होता है।

यकृत का सूत्रण रोग होता है - यकृत का सूत्रण रोग में यकृत कठोर व आकार में छोटा होता है। इसका रोगी दुर्बल ,पीला ,नीली नसें ,व उभरा हुआ चेहरा होता है। यकृत का सूत्रण रोग में यकृत कठोर व आकार में छोटा होता है। इसका रोगी दुर्बल ,पीला ,नीली नसें ,व उभरा हुआ चेहरा होता है। और यह आँतो में से प्रोटीन भोजन से उत्पन्न विषों के रक्त में चले जाने से व उनके दुष्प्रभाव से रोगी की मृत्यु  हो जाती है।
यकृत के रोगी को फलो का रस,सलाद,हरी सब्जियों का रस ,खट्टे फल, मौसमी ,मीठे फल जैसे - अरबी,आलू ,गाजर,चुकंदर ,खजूर ,अंजीर , किशमिश,आम ,पपीता आदि खाना लाभदायक होता है। व तले हुए पदार्थ चाय,कॉफ़ी ,तेज मसाले , व तम्बाकू का सेवन नहीं करना चाहिए। शराब पीने तो  यकृत रोगी के जहर होता है, यकृत रोगी अगर इसे बार बार यूज़ लेने से मृत्यु हो जाती है।

यकृत रोगी को किन किन पदार्थो का सेवन करना लाभदायक रहता है -
नींबू - यकृत रोगी को नींबू के चार भाग करे और उनके टुकड़े अलग अलग  ना हो। एक भाग में नमक ,एक भाग में काली मिर्च ,एक में सोंठ ,व चौथे भाग में मिश्री या शक्कर लगा कर , इनको रात किसी प्लेट से ढककर रख दे। और सुबह तवे पर गर्म करके चूसने से लिवर सही होने लगता है , ऐसे मरीजों के इससे बढ़कर कोई औषधि बनी नहीं है। 
धनिया - यकृत रोग वाले लोगो को धनिया ,सोंठ , काला नमक का चूर्ण बनाकर रखना चाहिए और दिन में तीन से चार बार इसका सेवन करना चाहिए जिससे मंदाग्रि सही होती है पर यकृत को शक्ति,व स्फुर्ति मिलती है और भूख भी लगती है।
सेब - सेब खाने से यकृत रोग वाले व्यक्ति को शक्ति मिलती है। 
चावल - यकृत रोग वाले व्यक्ति को सूर्योदय  से पहले उठकर मुँह साफ़ करके एक चुटकी चावल की फँकी लेनी चाहिए। यह उपयोग करने से यकृत को मजबूत करने के लिए बड़ा कारगर साबित हुआ है।
पान - खाने के पान के चिकनी और तेल लगाकर गर्म करके यकृत वाले स्थान पर बाँधने से यकृत के दर्द में लाभ प्राप्त होता है।
पपीता - पपीता पेट साफ करता है। व लीवर को ताकत प्रदान करता है। छोटे बच्चे जिनके यकृत ख़राब होता है। उन्हें पपीता खिलाना चाहिए।

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